News paper

ऐ प्यारे  न्यूज़ पेपर , ज़रा मुझे एक बात तो बता ! 

तुझे अपनी खबरें पढ़कर बेचैनी होती है क्या ? मेरी तरह तुझे भी परेशानी होती है क्या ?

कहते हैं सभी,  तुझे पढ़कर हमें दुनिया की खबरें मिल जाती हैं|  

पर न जाने मेरे साथ ऐसा क्यों होता है ? तुझसे मिलकर मेरा दिल रोता है| 

जब भी तुझे विस्तार से पढ़ती हूँ , मैं पूरी तरह हिल जाती हूँ 

ज्ञान का वर्धन तो नहीं होता मेरा , आत्मचिंतन में पड़ जाती हूँ। 

ये सोच के मेरा दिल काँप जाता है , हम मानव नहीं दानव बन गए हैं। 

चारों और विध्वंस की ध्वनि सुनाई देती है , हर चेहरे में बेचारगी दिखाई देती है। 

काश कुछ चमत्कार हो जाता , तेरे हर पन्ने पर खुशियों का रंग भर जाता 

हर खबर में कुछ सकारात्मक बात नज़र आती, मार काट का अंश मिट जाता।

Comments

Popular posts from this blog

Maa ki Vyathaa