Maa ki Vyathaa
क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा , आखिर कुच्चू मेरी बात सुनता क्यों नहीं! मैंने कहाँ कमी कर दी , क्या गलती हो गई मुझसे ?
मैंने तो तुझे पहले ही कहा था एक बच्चा ज़िद्दी होता है , कम से कम दो बच्चे तो होने ही चाहिए। रीति और उसकी माँ में रोज़ इस बात पर बहस हो ही जाती थी। "माँ आपके पास बात करने के लिए और कोई विषय नहीं होता, कुछ और कहना है तो कहिए नहीं तो मैं फ़ोन रखती हूँ। " फ़ोन रखने के बाद रीति अपने आपमें ही खो सी गई थी|
दरवाज़े पे आहट से उसका ध्यान टूटा। देखा तो दरवाज़े पर रोहन खड़ा था, माँ मैं कब से आपको आवाज़ लगा रहा था| कहाँ थे आप? यहीं थी कुच्चू , तेरी नानी का फ़ोन आया था| अच्छा, जो सामान मंगाया था ले आये? "हाँ, ले आया" कहते हुए रोहन किचन में सामान रखने चला गया|
चलो हाथ मुँह धो लो और पढ़ने बैठ जाना। क्या माँ जब देखो पढ़ने को कहती रहती हो ? मुझे अभी टीवी देखना है, मैं एक घंटे बाद पढूंगा। इसी बात पर माँ - बेटे में बहस हो जाती है और ज़ोर से आवाज़ आती है "चटैक " "चटैक" | रोहन रोते हुए कमरे से बाहर निकल जाता है और बुदबुदाता है कि आपको और आता ही क्या है ? बचपन से आपने मुझे मारा ही है। जैसे ही रीति ने ये सुना उसका चित बेचैन हो गया।
रात हो चली थी , विराज के घर आने का समय हो गया था। रोहन पापा के आने का समय हो गया है, उससे पहले अपना होमवर्क पूरा कर लो| रोहन ने कुछ जवाब नहीं दिया, चुपचाप अपना काम करने लगा। रीति ने सब्ज़ी बना ली थी, बस अपने पति का इंतज़ार कर रही थी| माँ मैंने अपना काम खत्म कर लिया है , अब मैं टीवी देख रहा हूँ।
इतने में फ़ोन की घंटी बजी, "अरे विराज ! कहाँ हो तुम ? कबसे तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ।"
सॉरी रीति ऑफिस में बहुत काम था इसलिए मैं फ़ोन भी नहीं कर पाया। सुनो यार मुझे एक हफ्ते के लिए देहरादून जाना पड़ रहा है। मैंने सुनील को बोला है , तुम प्लीज़ उसके हाथ मेरा बैग भिजवा देना और रोहन को भी समझा देना। तुम अपना और कुच्चू का ध्यान रखना।
फ़ोन रखने पर रीति चुपचाप सोफे पर बैठ गयी और आँखें बंद कर लीं| रोहन ने बोला माँ क्या हुआ? पापा अभी तक नहीं आये| रीति ने बोला पापा एक सप्ताह बाद आएंगे। रोहन ने कहा अच्छा तो आप इस बात से उदास हैं। अरे माँ मैं तो हूँ यहाँ आपके साथ, ज़ोरों से भूख लगी है मुझे खाना दो| रोहन ने खाना खाया और सो गया| रीति अपना काम निपटा कर सोने चली गयी|
सुबह हुई लेकिन आज रीति को उठने में देर हुई, जैसे ही अलार्म बजा उसकी नींद टूटी। वो घबरा कर उठी आज रोहन का स्कूल छूट जाएगा। कमरे से बाहर आयी तो उसने देखा रोहन स्कूल के कपड़े पहन कर तैयार हो गया था। मम्मा मेरी बस आ जाएगी जल्दी से मुझे टिफ़िन दे दो| रीति फटाफट लंच बॉक्स देती है और रोहन को स्कूल भेजती है|
रीति घर की सफाई कर रही थी , मेज़ के पास रोहन की किताब रखी थी उसे उठाया तो उसमें से एक कार्ड गिरा| जैसे ही रीति ने कार्ड खोला उसने देखा रोहन ने उसके लिए कार्ड बनाया था जिसमे लिखा था ----
" डिअर माँ !
मुझे पता है आप मेरे कारण परेशान रहते हो, मैं आपकी बात नहीं सुनता। पर मम्मा मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ| मैं पूरी कोशिश करूँगा की आपको कभी दुःख न दूँ। आयी लव यू वैरी मच।
आपका कुच्चू !"
कार्ड पढ़ कर रीति का मन प्रसन्न हो गया और अपनी माँ को फ़ोन कर सारी बात बताई। माँ मेरा बेटा मुझे बहुत प्यार करता है| मैं भी प्रयास करुँगी कि उसको प्यार से समझाऊं। उस पर हाथ नहीं उठाउंगी। अपने मन में उत्पन्न सभी व्यथाओं से मुक्त हो आज रीति का चित बहुत प्रसन्न और शांत था| ईश्वर से रोहन के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए रीति अपने दैनिक क्रियाकलाप में व्यस्त हो गई।
प्रीती मिश्रा !

Bahut hi pyari story ❤️
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